July 15, 2024

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GAYA : बिहार में टिड्डियों के प्रकोप से बचने के लिए कृषि अधिकारियों को किया गया अलर्ट, कृषि मंत्री प्रेम कुमार का बयान, उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में की जा रही है निगरानी।

पुरषोत्तम, गया: माननीय मंत्री, कृषि विभाग, बिहार डॉ० प्रेम कुमार ने कहा कि बिहार के पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में फसलों पर टिड्डियों के प्रकोप होने की सूचना समाचार के विभिन्न माध्यमों से प्राप्त हो रही है। हालांकि अब तक बिहार में इसके प्रकोप की सूचना नहीं है । फिर भी टिड्डियों के प्रकोप की सम्भावना के मद्देनजर कृषि विभाग के अधिकारियों को इससे सतर्क रहने के लिए अलर्ट जारी किया गया है।


माननीय मंत्री ने कहा कि खासकर उत्तर प्रदेश से सटे बिहार के सीमावर्ती जिलों में पूरी निगरानी करने का निदेश संबंधित जिला कृषि पदाधिकारियों एवं सहायक निदेशक, पौधे संरक्षण को दिया है। उन्होंने निर्देश दिया है कि टिड्डियों का फसलों पर आक्रमण होने की दशा में उस पर नियंत्रण एवं उसका प्रबंधन करने हेतु पूरी तरह से तैयार रहें। कृषि विभाग टिड्डियों के आक्रमण से निपटने में पूरी तरह से सक्षम है । उन्होंने राज्य के किसानों को भी इससे सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि कहीं भी टिड्डियों के बारे में जानकारी मिले तो तुरन्त इसकी सूचना स्थानीय कृषि पदाधिकारी को जरूर दें।

आगे कृषि मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में टिड्डियों के आक्रमण की स्थिति के संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही से दूरभाष पर वार्त्ता हुई है। वार्ता के क्रम में माननीय मंत्री के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री ने वहाँ के एक वरीष्ठ पदाधिकारी को टिड्डियों के लोकेशन एवं मूवमेन्ट के बारे में बिहार सरकार के कृषि पदाधिकारी को जानकारी साझा करने हेतु अधिकृत किया गया है। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग, बिहार की ओर से इस कार्य के लिए अपर निदेशक श्री धनंजयपति त्रिपाठी को यह जिम्मेवारी दी गई हैं। ये दोनों पदाधिकारियों आपस में समन्वय स्थापित कर टिड्डियों के प्रकोप के प्रत्येक दिन के घटना क्रम की जानकारी साझा करेंगे साथ ही, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा टिड्डियों से रोकथाम के लिए किये जा रहे कार्यों की जानकारी भी साझा करेंगे।

डॉ० कुमार ने कहा कि टिड्डियाँ फसलों एवं पेड़-पौधों को काफी नुकसान पहुँचाता है । ये अपने मार्ग में आने वाले हरे पेड़-पौधे, शाक-सब्जियों एवं फसलों को खाकर उन्हें भयंकर क्षति पहुँचाते हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर समूह बना कर टीन के डब्बों, थालियों, ढोल आदि बजाकर फसलों को बहुत हद तक टिड्डियों के प्रकोप से बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि फसलों पर ज्योंहि टिड्डियों का प्रकोप नजर आये तो त्वरित रूप से लैम्बडासायहेलोथ्रीन 5 ई०सी० की एक मि०ली० मात्रा प्रति लीटर पानी में अथवा क्लोरोपायरीफॉस 20 ई०सी० की 2.5 से 3 मि०ली० मात्रा प्रति लीटर पानी में अथवा फिपरोनिल 5 ई०सी० की एक मि०ली० मात्रा प्रति लीटर पानी में या डेल्टामेंथ्रीन 2.8 ई०सी० की 1 से 1.5 मि०ली० मात्रा प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने से टिड्डियों के प्रकोप से फसलों को बचाया जा सकता है।