September 27, 2023

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इरशाद अली आज़ाद, अध्यक्ष, शिया वक़्फ़ बोर्ड, बिहार

शिया वक्फ बोर्ड की चार साल में 17 गुणा बढ़ी आमदनी, अध्यक्ष इरशाद अली आजाद के कार्यकाल में बोर्ड का अभूतपूर्व विकास

PATNA: बिहार राज्य शिया वक्फ बोर्ड के कर्मठ, कर्तव्य निष्ठ, नौजवान अध्यक्ष इरशाद अली आजाद ने जब से अध्यक्ष पद का पदभार संभाला है तब से लेकर अब तक लगातार वक्फ बोर्ड की छवि बेहतर बनाने और संपत्तियों की सुरक्षा एवं उसे अतिक्रमण मुक्त कराने का प्रयास करते रहे हैं। पदभार संभालने के बाद जब वह पहली बार बोर्ड कार्यालय गए तो कार्यालय का बुरा हाल था। ना वहां लाइट की सही व्यवस्था थी और ना ही बोर्ड के कोष में समुचित राशि जमा थी। उन्होंने सभी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए अपने कार्य का आरंभ किया और अपनी सूझबूझ तथा मेहनत से कार्यालय की विधि व्यवस्था भी ठीक की और बोर्ड के कोष को भी मजबूत करने का काम किया। आज स्थिति यह है कि पटना ही नहीं पूर्ण बिहार के अल्पसंख्यकों में वह एक लोकप्रिय एवं कर्तव्य निष्ठ व्यक्तित्व के रूप में जाने जाते हैं। उनका मानना है कि सरकार ने जिस भरोसे और विश्वास के साथ मुझे कार्यभार सौंपा है उस पर मैं खरा उतरने का प्रयास कर रहा हूं। उनका यह भी मानना है कि किसी भी व्यक्ति की पहचान और लोकप्रियता उसके काम से होती है और इसी डगर पर चलने की मैं कोशिश कर रहा हूं।

श्री आजाद ने कहा कि यह भी सच्चाई है कि बिहार के विकास में वक्फ बोर्ड की बड़ी अहम भूमिका है। वक्फ बोर्ड के पास इतनी जमीन है कि अगर उसे अतिक्रमण मुक्त कराया जाए और उसका उचित उपयोग किया जाए तो बिहार में हर जगह विकास ही विकास नजर आएगा। वक्फ की भूमि का उपयोग स्कूल, मदरसा, अस्पताल, लाइब्रेरी, पर्यटन केंद्र, पुस्तकालय, बैंक्वेट हॉल, आवासीय प्लॉट, शॉपिंग मॉल, शो रूम इत्यादि के लिए जाएगा। यह भी बताना जरूरी है कि पिछले दशकों में समाज के कमजोर तबके के उत्थान हेतु शिक्षण संस्था, अस्पताल, मस्जिद, काबिस्तान, इमामबाड़ा इत्यादि के लिए नवाबों जमींदारों और दूसरे संपन्न लोग अपनी जमीन वक्फ कर दिया करते थे लेकिन इन संपत्तियों की सही देखभाल के अभाव में गैर कानूनी कबजे और खरीद बिक्री के कारण इनका उपयुक्त इस्तेमाल नहीं हो पाया।

पिछले साल लगभग ढाई हजार करोड़ की हसन इमाम वक्फ स्टेट की संपत्ति के टाइटल सूट का फैसला हजारीबाग सिविल कोर्ट ने शिया वक्फ बोर्ड के पक्ष में सुनाया था। हसन इमाम वक्फ स्टेट के ही प्लाट पर पटना सेंट्रल मॉल, वन मॉल, कौशल्य स्टेट, फजल इमाम शॉपिंग कंपलेक्स, विशाल मेगा मार्ट, रिजवान पैलेस, सकेत टावर, टाइम्स ऑफ इंडिया इत्यादि की इमारत बनी हुई है।

बोर्ड के अध्यक्ष से पूछा गया कि कई ऐसे प्लॉट्स हैं जिनका फैसला अदालत ने बोर्ड के पक्ष में सुनाया है लेकिन इन रातों में शॉपिंग कंपलेक्स आवासीय भवन शॉपिंग मॉल और दूसरी बड़ी इमारतें हैं इस बात का ध्यान रखते हुए कि इन जगहों पर बहुत बड़ा निवेश किया जा चुका है इस संबंध में आपके पास क्या व्यवहारिक समाधान है? तो अध्यक्ष ने बताया कि ऐसे मामले में हम चाहते हैं कि माननीय न्यायालय के फैसले के अनुसार वक्फ बोर्ड की जमीन पर बोर्ड का अधिकार स्वीकार कर लिया जाए। हम उन लोगों से सहानुभूति रखते हैं जो किरायादार, निवेशक या डेवलपर के रूप में इन जमीनों से जुड़े हुए हैं, लेकिन उन सभी को यह समझना चाहिए कि वक्त की संपत्ति पब्लिक प्रॉपर्टी है और उसे प्राप्त करने का एकमात्र तरीका अधिक से अधिक 30 साल का लीज है। हम उन्हें अपना किरायादार के रूप में स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। यह भी स्पष्ट है कि हम भी कानून के पाबन्द हैं और कोई भी समाधान कानून के दायरे में रहकर ही निकाला जा सकता है।

माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी बोर्ड को लिखे अपने पत्र में कहा है कि वक्फ सम्पत्ति की सुरक्षा, अतिक्रमण मुक्त कराने एवं वक्फ सर्वेक्षण को सुनिश्चित करने तथा अल्पसंख्यकों की कल्याणकारी योजनाओं को कार्यान्वित करने के लिए राज्य सरकार हर सम्भव सहायता प्रदान करेगी। राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार तथा स्वरोजगार को बढ़ावा देना चाहती है इसके लिए शिया बोर्ड से काफी आशा व्यक्त की गई है।

अध्यक्ष इरशाद अली आजाद के कार्यकाल में उपलब्धियां

बिहार स्टेट शिया वक्फ बोर्ड का चार साल में टैक्स 37 गुणा बढ़ गया। वहीं आमदनी में सालाना 17 गुणा इजाफा हुआ जबकि सरकारी अनुदान तीन गुणा अधिक मिल रहा है। चार साल पहले बोर्ड की हालत खस्ताहाल थी टैक्स केवल 2.73 लाख ही वसूला जा रहा था पर अब टैक्स एक करोड़ सालाना हो गया है। चार साल पहले बोर्ड की आमदनी 30 लाख सालाना थी जो अब 17 गुणा बढ़कर करीब 5 करोड़ हो गया। 2016 से पहले सरकार बोर्ड को सालाना 20 लाख का अनुदान देती थी।  2016 में 80 लाख हुआ और अब बजटीय प्रावधान के तहत 2.36 करोड़ देती है। सरकार का जो अनुदान मिलता था या जो मिल रहा है, वह बोर्ड के अधिकारियों, स्टाफ के वेतन व गैर वेतन मद में खर्च होता है।

2016 से जब बोर्ड का टैक्स बढ़ा, आमदनी बढ़ी और सरकारी अनुदान बढ़ गया तो बोर्ड ने सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के तहत अल्पसंख्यकों के लिए काम करना शुरू कर दिया। 2018 से अब तक बोर्ड ने करीब 103 गरीब बच्चियों की शादी के लिए हरेक को 25 हजार सहायता राशि दी। एक साल से एक करोड़ की छात्रवृति वैसे गरीब छात्रों को दिया जा रहा है जो यहां के मूल निवासी हैं और जो बिहार या बिहार के बाहर तकनीकी, शैक्षिक या मैनजेमेंट या किसी भी संस्थान में पढ़ रहे हैं। तीन साल से पटना सिटी के एक निजी स्कूल जिसे बोर्ड ने कब्जे में लिया है, वहां 100 छात्रों को फ्री एजुकेशन दे रही है। मुजफ्फरपुर में जीडी गोयंका को, फुलवारीशारीफ के मुरादपुर में हैदरी एजुकेशनल ट्रस्ट और पटना के बाइपास में शाह अजीमाबाद वेल्फयेर ट्रस्ट को स्कूल बनाने के लिए जमीन दी गई। ये स्कूल बन रहे हैं। 30 साल का एग्रीमेंट हुआ है। स्कूल बन जाने के बाद इन स्कूलों में 20 फीसदी अल्पसंख्यक छात्र फ्री में पढ़ेंगे। पिछले चार सालों से हरेक साल ठंड के मौसम में करीब एक हजार गरीबों को कंबल दिया जा रहा है। 2018 से वक्फ में रजिस्टर्ड 105 मस्जिदों के हरेक पेश इमाम को 4 हजार और मोअज्जिन को 2 हजार वजीफा के रूप में दिया जा रहा है। चार साल में करीब 300 परिवारों का आवास के लिए 30 साल के लिए लीज पर जमीन दी गई। अब बोर्ड की जमीन पर हरेक जिले में सरकार अल्पसंख्यक आवासीय विधालय बनाने वाली है। दरंभगा में स्कूल बनना शुरू हो गया है। सीवान, मुजफ्फरपुर, भागलपुर व पूर्णिया में बोर्ड ने स्कूल के लिए जमीन दे दी है। हरेक स्कूल की लागत 59 करोड़ है। बोर्ड की संपत्ति की देखरेख करने के लिए अब 350 खादिमों की बहाली होने वाली है। साथ ही मेडिकल एवं नेत्र जांच शिविर का आयोजन कराना डेड बॉडी फ्रीज़र उपलब्ध कराना, यतीम और बेसहारा छात्रों के लिए यतीमखाना के लिए जमीन दी गई और यतीमखाना बनकर तैयार हो चुका है जिसमें तत्काल 30 छात्रों की व्यवस्था की गई है, वृद्ध आश्रम के लिए भी विचार किया जा रहा है, शाद अज़ीमाबादी के नाम पर लाईब्रेरी और रिसर्च सेंटर के लिए भी जगह उपलब्ध कराई जा चुकी है। राज्य  के सभी जिलों के मस्जिद इमामबाड़ा कर्बला इमाम चौक इत्यादि में सैकड़ों खादिम की बहाली भी की जाएगी साथ ही तत्काल सेवा के तौर पर एंबुलेंस सेवा भी पूर्ण बिहार में उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अतिरिक्त बोर्ड ने राज्य के सभी वक्फ स्टेट के मुतवल्ली, प्रबन्धक, प्रबन्ध समिति आदि को जन कल्याण हेतु वक्फ स्टेट की कुल आय का 10 प्रतिशत खर्च करने का निर्देश दिया है।

वक्फ के अरबों की संपत्तियों को कराया गया मुक्त

बोर्ड ने पिछले चार सालों में अरबों रुपए की वक्फ संपत्तियों को कब्जे से मुक्त कराया। पटना समेत बिहार में करीब 105 लोगों पर केस दर्ज किया गया। बोर्ड ने अपनी  की लीगल टीम के माध्यम से पटना में अल्ताफ नवाब वक्फ स्टेट, मीर नादिर अली वक्फ स्टेट, कर्नल कल्बे अली खान वक्फ स्टेट, खुर्शीद हसनैन वक्फ स्टेट, फजल इमाम शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, बीबी हबीबन वक्फ स्टेट, मुजफ्फरपुर, महमूदुन्निसा वक्फ स्टेट, मोतिहारी को अवैध कब्जे से मुक्त कराया और इसे बोर्ड के अधीन लाया। यही नहीं पिछले साल ही पटना में 2500 करोड़ की हसन इमाम वक्फ स्टेट की संपत्ति का टाइटल सूट जो हजारीबाग कोर्ट में चल रहा था, वह बोर्ड के पक्ष में आया।

2016 से पहले बाेर्ड के पास सालाना आमदनी सरकारी अनुदान के रुप में 20 लाख, टैक्स के रूप में 2.37 लाख और आमदनी के रूप में 30 लाख थी। इस वजह से बोर्ड अल्पसंख्यकों के लिए कल्याणकारी योजनाएं लागू नहीं कर पाता था। कर्मियों को वेतन देने के भी पैसे नहीं थे। बोर्ड के पास लीगल टीम नहीं थी इसलिए अतिक्रमण किए हुए वक्फ की संपत्ति खाली करा पाना मुहाल था। जिन लोगों ने कब्जा कर रखा था, उन लोगों पर केस कभी कभार होते थे। बोर्ड ऐसे लोगों पर केस भी करने से डरता था।

क्या है टैक्स व आमदनी बढ़ने की वजह ?

दरअसल बोर्ड की संपत्ति से जो पहले टैक्स वसूला जाता था, उसपर ध्यान नहीं दिया जाता था। चार साल पहले बोर्ड में केवल 219 वक्फ ही रजिस्टर्ड थे जो अब बढ़कर 311 हो गए। रजिस्टर्ड वक्फ स्टेट्स की संख्या बढ़ने से टैक्स भी ज्यादा आने लगा। यही नहीं बोर्ड ने पिछले चार साल में पटना समेत पूरे बिहार में हजारों करोड़ रुपए की संपत्ति को छुड़ाया और इसे बोर्ड के अधीन लाकर रजिस्टर्ड किया। इससे टैक्स भी बढ़ा और आय भी।

क्या है वक्फ का कानून ?

वक्फ एक्ट 1995 के अनुसार, जो प्रॉपर्टी एक बार किसी ने वक्फ कर दी, वह हमेशा वक्फ रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में स्पष्ट किया था कि वक्फ की संपत्ति न तो ट्रांसफर की जा सकती है और न ही खरीदी या बेची जा सकती है। 2014 में एक संशोधन द्वारा वक्फ बोर्ड की जमीन की खरीद- बिक्री करने वालों के विरुद्ध गैर जमानतीय फौजदारी की धाराओं के तहत मुकदमा करने का प्रावधान है।