July 15, 2024

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GAYA: शेरघाटी अनुमंडल के अतिनक्सल प्रभावित क्षेत्र अनरबन सलैया में 40 साल से नहीं पहुंचे सरकारी अफसर

Avinash, Gaya: जी हां, आज हम बात करेंगे डुमरिया प्रखंड के छकरबंधा पंचायत के आजाद बीघा, अरबन सलैया, बूढा बूढ़ी, और गोपालडेरा गांव की। जहाँ 1000 के लगभग मतदाता हैं, इनलोगों को अगर मतदान भी करना होता है तो 130 किलोमीटर की दूरी तय कर प्रखंड कार्याल डुमरिया पहुंचते हैं। कारण इन गांवों से होकर सड़क डुमरिया नहीं जाती है। अगर जाती है तो मात्र 18 किलोमीटर की दूरी तय करना पड़ता है। प्रखंड कार्यालय डुमरिया पहुंचने के लिए सड़क नहीं रहने के कारण ग्रामीणों को औरंगाबाद जिला के बालूगंज होकर देव पहुंचना पड़ता है। देव के बाद गया जिला के शेरघाटी होते हुए डुमरिया पहुंचते हैं। और पदाधिकारी से मिलकर अपनी फरियाद सुनाते हैं। अगर अधिकारी नहीं मिले तो छकरबंधा मुखिया संजव साँव के घर रात बिताते हैं तो कोई अपने रिस्तेदार के यहाँ ठहर जाता है।

ग्रामीणों ने ये भी बताया कि इस गांव में कभी पोलियो की खुराक भी नहीं पहुंच पाई है। स्थानीय मुखिया संजय के प्रयास से गांव में बिजली तो आ गई लेकिन नल जल योजना अभी तक चालू नहीं हुई है। वहीं नल जल के ठीकेदार नरेश कुमार दांगी ने बताया कि बरसात के मौसम में इस गांव में गाड़ी नहीं आ सकती है। इसलिए काम नहीं हो पाया है। अभी बोरबेल लगा दिया गया है। 10 से 15 दिनों में सभी के घर में पानी मिलने लगेगा।

ग्रामीण बताते हैं हम लोगों को पंचायत चुनाव में मतदान केंद्र इसी गांव में बन जाता तो 130 किलोमीटर दूर जाकर मतदान नहीं करना पड़ता। अगर पैदल जाते हैं, पहाड़ी के रास्ते तो 18 किलोमीटर की दूरी तय करना पड़ता है। मुखिया जी मतदान के एक दिन पहले ही कोई वाहन भेज देते हैं, जिससे हमलोग चले जाते हैं। ग्रामीणों ने ये भी बताया कि हमलोगों का BLO प्रवेश पासवान तो कभी आते ही नहीं हैं। जबकि मतदाता सूची में नाम जोड़ा जा रहा है लेकिन हमारे यहाँ ये भी काम नहीं होता है। बहुत लोगों का तो वोटर लिस्ट में नाम भी नहीं है। ग्रामीण कहते हैं जब से मुखिया संजय साव बने हैं, तब से गांव में कुछ विकास हो रहा है। कम से कम अधिकारियों को तो अपने साथ लेकर आते हैं। अधिकारी न भी आये तो खुद 1 या दो माह में यहाँ जरूर आते हैं और हमलोगों का दुःख दर्द सुनकर जाते हैं उसका समाधान करते हैं।

 

ग्रामीण बताते हैं कि हमलोगों के यहाँ 1980 में डुमरिया प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकार अनवर टोपो आये थे और हमलोगों के बीच कुछ वस्त्र का वितरण किये थे उसके बाद कोई भी पदाधिकारी इस गांव में नहीं आया। सड़क भी पास हुआ है। आजाद बिघा से डुमरिया तक लेकिन संवेदक काम ही चालू नहीं कर पा रहा है। शायद उसे भी डर हो, नक्सलियों का। चुकी ये क्षेत्र पहाड़ों से घिरा है। गया जिला और औरंगाबाद जिला के बॉडर पर स्थित है। औरंगाबाद सांसद सुशील सिंह को भी इस गांव में जाकर देखने की जरूरत है। मैं खुद शेरघाटी से 130 किलोमीटर वाहन और उसके बाद 4 किलोमीटर पैदल चलकर इस गांव में पहुंचा था। शहर के विकास के साथ साथ सरकार इन गांवों पर भी ध्यान देने की जरूरत है। हालांकि इस गांव में अधिकतर भोक्ता जाति के लोग निवास करते हैं। स्थानीय मुखिया संजय साव ने कहा कि गया जिलाधिकारी महोदय को चाहिए इस गांव में ही इस पंचायत चुनाव में मतदान केंद्र स्थापित करे ताकि सभी मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग पूर्ण रूप से कर सके।

ग्रामीणों ने 2015 में एक श्रमदान कर एक कैनाल का भी निर्माण करवाया था लेकिन वो कैनाल एक बरसात भी नहीं झेल पाया और टूट गया। साथ ही ग्रामीणों का सपना भी टूट गया जो 1000 एकड़ जमीन सिंचित होने वाला था। ग्रमीणों को बस एक उम्मीद है कि कोई पदाधिकारी यहाँ आते और हमलोगों की समस्या को सुनते और निदान करते। ग्रामीण महेंद्र सिंह भोक्ता बताते हैं कि अगर ये कैनाल बन जाता तो बरसात के पानी से हजारों एकड़ जमीन उपजाऊ हो जाता। वहीं उन्होंने ने बताया कि पहले तो मुखिया चुनाव के वक्त आते थे। फिर उन्हें हमलोग कभी नहीं देख पाते थे। लेकिन इस बार के मुखिया संजय साव ही एक ऐसे मुखिया हैं, जो हमेसा हमारे गांव में आते रहते हैं समस्याओं का निदान करते हैं।