April 22, 2024

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प्लेसेज ऑफ वर्शिप ऐक्ट को बनाने वाले जस्टिस ही ज्ञानवापी मस्जिद मामले की SC में करेंगे सुनवाई

NEW DELHI: सुप्रीम कोर्ट में ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे कराने के खिलाफ याचिका पर मंगलवार को सुनवाई होगी. मस्जिद कमेटी अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमिटी ने याचिका दायर की है. इस याचिका पर जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और पी एस नरसिंहा की बेच सुनवाई करने जा रही है. याचिका में सर्वे पर रोक लगाने की बात कही गई है. डी वाई चंद्रचूड़ वही जस्टिस हैं जिन्होंने 1991 में प्लेसेज ऑफ वर्शिप ऐक्ट को अच्छा बताकर कानून पर मुहर लगाई थी. 9 नवंबर 2019 को आयोध्या मामले में फैसला सुनाने वाले पांच जजों के पीठ में जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ भी शामिल थे.

क्या है 1991 में बना प्लेसेज ऑफ वर्शिप ऐक्ट ?

दरअसल 1991 में तत्कालीन नरसिंहा राव की सरकार ने प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट बनाया था. इस कानून का उद्देश्य अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विवाद को खत्म करना था. इस कानून में ये प्रावधान किया गया था कि बाबरी मस्जिद के अलावा देश में किसी भी जगह धार्मिक स्थलों पर किसी भी धर्म के लोगों का दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा. 15 अगस्त, 1947 से पहले वाली तमाम धार्मिक ढांचे जिस रुप में हैं उसपर दूसरे धर्म के लोगों का दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा. अब सवाल उठता है कि जिस जस्टिस ने इस कानून को मंजूरी दी थी. वो अब इसे लेकर क्या रुख अख्तियार करते हैं.

इधर यूपी की अदालत ने ज्ञानवापी मस्जिद के परिसर में बने उस तालाब को सील करने का आदेश दिया है, जहां शिवलिंग के मिलने का दावा किया जा रहा है. बताया जा रहा है कि ज्ञानवापी मस्जिद के उपरी हिस्से में नामाज पढ़ने की जगह के बगल में एक तालाब बनाया गया था. जिसमें वजू किया जाता था. सर्वे के तीसरे दिन इसी तालाब में शिव लिंग मिलने का दावा किया जा रहा है. इसके बाद हिंदू याचिका कर्ता बनारस के जिला कोर्ट पहुंचे और इसे जगह को संरक्षित करने की बात कही. जिसपर कोर्ट ने आदेश दिया कि फिलहाल इस जगह को सील कर किसी के भी आने जाने पर प्रतिबंध लगा दिया जाए. हिंदू पक्ष के वकील नंदन चतुर्वेदी ने ये जानकारी दी.

वहीं मुस्लिम पक्ष के वकील आलोक नाथ यादव ने बताया कि हमारी तरफ से अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए तालाब को सील करने के फैसले को रद्द करने की अपील करेंगे. कानून के सभी विकल्पों का सहारा लिया जाएगा.