July 15, 2024

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नीतीश कुमार का ‘लवकुश’ समीकरण है उमेश कुशवाहा का JDU प्रदेश अध्यक्ष बनना

Patna: मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने अपने फैसले से एकबार फिर सबको चौंका दिया है। उमेश कुशवाहा (Umesh Kushwaha) को जेडीयू में बड़ा बदलाव करते हुए बिहार जेडीयू का प्रदेश अध्यक्ष पद (Bihar JDU President) पर बैठा दिया गया है। ये फैसला नीतीश कुमार और जेडीयू के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष आरसीपी सिंह की सहमति से लिया गया । माना जा रहा था कि कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी को भी ये जिम्मेदारी नियमित की जा सकती है। लेकिन हुआ वही जिसका सभी को कहीं न कहीं अंदेशा था। यानी नीतीश कुमार हमेशा से अपने फैसले से सभी को चकित करते आए हैं। इस बार भी हुआ वही। उमेश कुशवाहा पर नीतीश कुमार ने जिस तरह से अपना भरोसा जताया है वो एक बड़ा सियासी संकेत है। इस फैसले से साफ जाहिर होता है कि नीतीश कुमार बिहार चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद वो अपने लव कुश समीकरण पर ही आगे बढ़ना चाहते हैं। वहीं, जेडीयू को एक युवा नेतृत्व की जरूरत है और उमेश कुशवाहा जेडीयू के युवा नेता हैं।

उमेश कुशवाहा की इंट्री से सभी लोग अचंभित रह गए। आखिर कौन हैं उमेश कुशवाहा? ये सवाल सभी की जुबान पर है। उमेश कुशवाहा के पिता वासुदेव प्रसाद सिंह पेशे से शिक्षक रहे हैं। 2018 में 48 साल के उमेश कुशवाहा (Umesh Kushwaha) पर हत्या का भी आरोप लग चुका है। चर्चित मनीष सहनी हत्याकांड के उमेश कुशवाहा मुख्य आरोपी भी रहे हैं। बाद में उन्हें आरोप से मुक्त कर दिया गया।

उमेश कुशवाहा का सियासी सफरनामा

साल 2001 में उमेश कुशवाहा (Umesh Kushwaha) पहली बार जिला परिषद का चुनाव जीतकर सियासत में आये। आरजेडी से सियासत में उनकी शुरूआत हुई। वैशाली के जंदाहा (Jandaha) सीट से फरवरी 2005 में वह आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़े थे। लेकिन चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। साल 2005 में विधानसभा भंग होने के बाद हुए चुनाव में दोबारा उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद वो 2007 में जेडीयू पार्टी में शामिल हो गए। इसके किन्हीं कारणों की वजह से उन्होंने 2010 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी छो़ड़ दी।

अब बात करे तो साल 2010 में जंदाहा सीट महनार विधानसभा (Mahnar Asssembly Seat) सीट में बदल गई। उमेश कुशवाहा (Umesh Kushwaha) ने महनार सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा। लेकिन इस बार वो तीसरे स्थान पर रहें। किसी तरह साल 2012 में उनकी वापसी जेडीयू में दोबारा हो गई। 2015 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी-जेडीयू महागठबंधन बना। जिसमें वो महागठबंधन के प्रत्याशी के रूप में महनार विधानसभा सीट (Mahnar Asssembly Seat) से चुनाव लड़ें। इस चुनाव में वो बीजेपी प्रत्याशी अच्युतानंद सिंह को हराकर पहली बार विधायक बने। लेकिन पिछले साल 2020 के चुनाव में वो बाहुबली नेता रामा सिंह की पत्नी और आरजेडी प्रत्याशी वीणा सिंह से चुनाव हार गये।

हत्या का लगा था आरोप

जंदाहा प्रखंड प्रमुख मनीष सहनी की साल 2018  में हत्या हो गई थी। इस हत्या कांड में उमेश कुशवाहा समेत 11 लोगों पर एफआईआर दर्ज कराई गई थी। लोक समता पार्टी के मनीष सहनी राष्ट्रीय जिला सचिव भी थे। हालांकि बाद में इस मामले से उमेश कुशवाहा मुक्त कर दिए गए।